रीवा जिले के सरकारी कॉलेजों में इस बार एडमिशन प्रक्रिया बुरी तरह फ्लॉप रही। 18 कॉलेजों में कुल 27,445 सीटों में से 10,142 सीटें खाली रह गईं। खासकर बैकुंठपुर और संस्कृत कॉलेजों की हालत बेहद खराब है। बैकुंठपुर कॉलेज में 1260 सीटों में से केवल 39 पर ही एडमिशन हुआ। कई नामी कॉलेज भी सीटें नहीं भर पाए, जिससे उच्च शिक्षा की गिरती मांग पर सवाल उठ रहे हैं।
जानिए मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी कॉलेजों में लाखों सीटें क्यों खाली रह रही हैं। ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया की जटिलता और तकनीकी समस्याओं के कारण छात्रों को हो रही परेशानी।
रीवा जिले के 18 सरकारी कॉलेजों में इस साल प्रवेश की स्थिति बेहद खराब है। कुल 27,445 सीटों में से अब तक सिर्फ 13,587 भरी गई हैं, यानी 14,000 से ज्यादा सीटें खाली हैं। कई नए खुले कॉलेजों में हालात और भी बुरे हैं—बैकुंठपुर में 1260 सीटों में सिर्फ 41 प्रवेश हुए हैं। गर्ल्स डिग्री कॉलेज, जो कभी सबसे ज्यादा लोकप्रिय था, वहां भी 50% से कम एडमिशन हुआ है। उच्च शिक्षा विभाग हर दूसरे दिन CLC राउंड चला रहा है, लेकिन छात्र नहीं मिल रहे।
सतना और मैहर जिले के 8 शासकीय महाविद्यालय अभी भी स्कूल भवनों में संचालित हो रहे हैं। वर्षों से भवन निर्माण अधूरा, संसाधनों का अभाव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर संकट। क्या सरकार देगी ध्यान?
















